चमोली। मुख्य शिक्षा अधिकारी आकाश सारस्वत ने आज गुरुवार को प्रातः क्षेत्र के विभिन्न विद्यालयों का औचक निरीक्षण कर शैक्षणिक एवं प्रशासनिक व्यवस्थाओं का जायजा लिया। इस दौरान उन्होंने राजकीय इंटर कॉलेज नारायणबगड़, राजकीय आदर्श प्राथमिक विद्यालय नारायणबगड़, राजकीय इंटर कॉलेज कोटी चांदपुर , राजकीय इंटर कॉलेज जयपुर कोलसों और राजकीय प्राथमिक विद्यालय कोटी का निरीक्षण किया।
औचक निरीक्षण के दौरान मुख्य शिक्षा अधिकारी ने विद्यालयों में शिक्षण-अधिगम व्यवस्था, विद्यार्थियों की शैक्षणिक प्रगति, उपस्थिति, विद्यालयी वातावरण तथा विभिन्न शैक्षणिक कार्यक्रमों के क्रियान्वयन की स्थिति का अवलोकन किया।
मुख्य शिक्षा अधिकारी ने राजकीय इंटर कॉलेज नारायण बगड़ की प्रार्थना सभा में पहुंचकर शिक्षकों एवं बच्चों को संबोधित किया जिसमें नशे के विरुद्ध खड़े होने की बात कही गई,
निरीक्षण के दौरान राजकीय इंटर कॉलेज नारायणबगड़ की शिक्षण व्यवस्था पर मुख्य शिक्षा अधिकारी ने संतोष व्यक्त किया। उन्होंने विद्यालयों के शिक्षकों से कहा कि वर्तमान समय में केवल पाठ्यक्रम को पूर्ण करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि प्रत्येक बच्चे के वास्तविक सीखने के स्तर को समझते हुए सीखने के प्रतिफलों के आधार पर दक्षता आधारित शिक्षण सुनिश्चित किया जाना आवश्यक है।
मुख्य शिक्षा अधिकारी आकाश सारस्वत ने विद्यालयों में बताया कि कक्षा 2 कक्षा 5 और कक्षा 8 की दक्षता आधारित द्वितीय आकलन परीक्षा 5 अक्टूबर को आयोजित होगी जिसमें प्रत्येक विद्यालय अपने शत प्रतिशत बच्चों की उपस्थिति सुनिश्चित करे l
उन्होंने कहा कि इन आकलन की रिपोर्ट प्रत्येक विद्यालय के पास उपलब्ध होनी चाहिए तथा विद्यालय स्तर पर उसका गंभीरता से अध्ययन किया जाना चाहिए। अतः शिक्षकों और विद्यालय प्रशासन की जिम्मेदारी है कि वे परिणामों का विश्लेषण कर बच्चों की कमियों और आवश्यकताओं को पहचानें तथा उनके सुधार के लिए ठोस कार्ययोजना बनाए और न्यून दक्षताओं पर उपचारात्मक शिक्षण देना सुनिश्चित करे।
मुख्य शिक्षा अधिकारी ने कहा कि सर्वेक्षण और मूल्यांकन का उद्देश्य केवल आंकड़े एकत्र करना नहीं है, बल्कि उनके आधार पर शिक्षण व्यवस्था में आवश्यक सुधार करना है। विद्यालयों को चाहिए कि वे बच्चों के कमजोर अधिगम क्षेत्रों की पहचान कर नियमित अभ्यास, पुनरावृत्ति, उपचारात्मक शिक्षण तथा दक्षता आधारित गतिविधियों के माध्यम से विद्यार्थियों के सीखने के स्तर में सुधार लाएं।
उन्होंने शिक्षकों से कहा कि विद्यालय स्तर पर विद्यार्थियों की शैक्षणिक प्रगति का नियमित मूल्यांकन किया जाए और प्रत्येक बच्चे की प्रगति पर विशेष ध्यान दिया जाए। शिक्षण प्रक्रिया को रोचक, गतिविधि आधारित और बाल-केंद्रित बनाते हुए बच्चों की सक्रिय सहभागिता सुनिश्चित की जानी चाहिए।
मुख्य शिक्षा अधिकारी आकाश सारस्वत ने स्पष्ट कहा कि शासकीय कार्यालयों एवं विद्यालयों में कार्य के प्रति लापरवाही, अनावश्यक अनुपस्थिति और दायित्वों के निर्वहन में कोताही को स्वीकार नहीं किया जाएगा। सभी अधिकारी एवं कर्मचारी अपने निर्धारित दायित्वों का निष्ठा, अनुशासन और जिम्मेदारी के साथ निर्वहन करें।
उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए विद्यालयों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षण के साथ-साथ प्रशासनिक स्तर पर भी जवाबदेही और कार्य संस्कृति का होना आवश्यक है। नियमित निरीक्षण का उद्देश्य केवल कमियां निकालना नहीं, बल्कि व्यवस्थाओं को बेहतर बनाना, समस्याओं की पहचान करना और उनका समयबद्ध समाधान सुनिश्चित करना है।
इस दौरान मुख्य शिक्षा अधिकारी के साथ खंड शिक्षा अधिकारी नारायणबगड़ अनिनाथ और मुख्य शिक्षा अधिकारी कार्यालय में प्रधान सहायक राहुल तिवारी शामिल रहे l
