चमोली। माँ गंगोत्री की पावन धरती से शुरू हुई सेवा यात्रा भगवान बदरीविशाल की भूमि में हुई पूर्ण; कर्तव्य, अनुशासन और जनसेवा को जीवन का मूलमंत्र बनाकर निभाई जिम्मेदारी , 24 वर्ष की समर्पित पुलिस सेवा को विराम, हेड कांस्टेबल मोहन सिंह रावत सेवानिवृत्त।

भारतीय सेना से पुलिस सेवा तक निभाया कर्तव्य; रुद्रप्रयाग और चमोली में दी सेवाएं, कर्तव्यनिष्ठा एवं समर्पण के साथ पूर्ण किया सेवाकाल । आज दिनांक 30 सितम्बर 2026 को पुलिस कार्यालय गोपेश्वर सभागार में पुलिस अधीक्षक चमोली सुरजीत सिंह पँवार की उपस्थिति में निरीक्षक देवेन्द्र सिंह रावत के अधिवर्षता आयु पूर्ण करने पर भावपूर्ण विदाई समारोह आयोजित किया गया। इस अवसर पर पुलिस अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने उन्हें भावभीनी विदाई देते हुए उनके दीर्घ एवं गौरवमयी सेवाकाल को याद किया।

विदाई समारोह में पुलिस अधीक्षक चमोली सुरजीत सिंह पँवार ने निरीक्षक देवेन्द्र सिंह रावत द्वारा पुलिस विभाग को दिए गए दीर्घकालीन योगदान एवं सेवाओं की सराहना की। उन्होंने कहा कि पुलिस सेवा में लंबे समय तक पूरी निष्ठा, अनुशासन एवं जिम्मेदारी के साथ कर्तव्यों का निर्वहन करना अपने आप में गौरव की बात है। उन्होंने सेवानिवृत्त अधिकारी के स्वस्थ, सुखमय एवं उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए कहा कि सेवा से सेवानिवृत्ति केवल विभागीय दायित्वों से होती है, समाज के प्रति जिम्मेदारी और सेवा भावना कभी समाप्त नहीं होती। उन्होंने भविष्य में किसी भी प्रकार की समस्या अथवा सहायता की आवश्यकता होने पर निःसंकोच पुलिस विभाग से संपर्क करने की बात कही।

माँ गंगोत्री के दर्शन से शुरू हुई सेवा यात्रा, बदरीविशाल की भूमि में हुआ समापन।

अपने विदाई संबोधन में निरीक्षक देवेन्द्र सिंह रावत ने कहा कि आज का दिन उनके लिए भावुक होने के साथ-साथ गौरव का भी क्षण है। लगभग चार दशक से अधिक लंबी पुलिस सेवा के बाद आज वे वर्दी में अपनी गौरवमयी यात्रा के अंतिम पड़ाव पर खड़े हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें संतोष है कि ईश्वर ने उन्हें ऐसा जीवन दिया, जिसे उन्होंने कर्तव्य, अनुशासन और जनसेवा के लिए समर्पित किया।

उन्होंने बताया कि वर्ष 1986 में उत्तर प्रदेश पुलिस में आरक्षी पद पर चयनित होकर उन्होंने आरटीसी सहारनपुर में प्रशिक्षण प्राप्त किया। प्रशिक्षण पूर्ण होने के बाद उत्तरकाशी में रिक्रूट आरक्षी के रूप में उनकी प्रारंभिक नियुक्ति हुई। सेवा का पहला दिन ही उनके लिए अविस्मरणीय बन गया, जब नियुक्ति के तत्काल बाद उन्हें गंगोत्री धाम में एस्कॉर्ट ड्यूटी पर भेजा गया। उन्होंने भावुक होकर बताया कि उनके पुलिस जीवन का पहला दिन माँ गंगोत्री के पावन दर्शन से प्रारंभ हुआ, जिसे वे अपने जीवन का विशेष सौभाग्य मानते हैं।

इसके पश्चात छह माह के व्यावहारिक प्रशिक्षण के लिए थाना मनेरी में नियुक्ति हुई। बाद में थाना बड़कोट में सेवा का अवसर मिला, जो माँ यमुनोत्री धाम का प्रवेश द्वार है। इस प्रकार सेवा के शुरुआती वर्षों में ही उन्हें माँ गंगोत्री एवं माँ यमुनोत्री के पावन दर्शन का सौभाग्य प्राप्त हुआ।

पुलिस सेवा के दौरान उन्होंने उत्तर प्रदेश पुलिस की 100 मीटर राइफल शूटिंग प्रतियोगिता में जनपद उत्तरकाशी का प्रतिनिधित्व करते हुए सफलता प्राप्त की और गढ़वाल रेंज का प्रतिनिधित्व करने का अवसर हासिल किया। इसके बाद विशेष शाखा, अभिसूचना विभाग उत्तरकाशी तथा गोविन्दघाट आतंकवाद निरोधक सेल में लगभग तीन वर्षों तक सेवा की। इस दौरान भगवान बदरीविशाल एवं श्री हेमकुण्ड साहिब लोकपाल जी महाराज के दर्शन का सौभाग्य भी उन्हें प्राप्त हुआ।

वर्ष 2000 में उत्तराखण्ड राज्य गठन के बाद अनुकम्पा के आधार पर उनका स्थानांतरण स्थानीय अभिसूचना इकाई जनपद रुद्रप्रयाग में हुआ। गौरीकुण्ड यूनिट में लगभग चार वर्षों तक यात्रा काल में सेवा करते हुए उन्हें माँ गौरी, बाबा केदारनाथ एवं त्रिजुगीनारायण के पावन दर्शन का अवसर मिला। उन्होंने कहा कि पीछे मुड़कर देखने पर ऐसा लगता है कि ईश्वर एवं पितरों की कृपा और परिजनों के आशीर्वाद से उन्हें केवल नौकरी ही नहीं मिली, बल्कि चारधाम की पवित्र भूमि में सेवा करने का अनुपम अवसर प्राप्त हुआ।

उपनिरीक्षक नागरिक पुलिस की प्रतियोगी परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद प्रशिक्षण पूर्ण कर वर्ष 2006-07 में उनका स्थानांतरण देहरादून हुआ। यहां उन्होंने महत्वपूर्ण चौकियों के प्रभारी के रूप में कार्य किया। वर्ष 2010 के ऐतिहासिक एवं धार्मिक महाकुंभ मेले के दौरान थाना चन्द्रभागा क्षेत्र के थानाध्यक्ष के रूप में भी जिम्मेदारी निभाई।

वर्ष 2010 की ऋषिकेश क्षेत्र की भीषण बाढ़ को याद करते हुए उन्होंने बताया कि चन्द्रभागा एवं शीशमझाड़ी क्षेत्र में रात्रि के समय सैकड़ों श्रद्धालुओं एवं स्थानीय नागरिकों का जीवन संकट में था। उस कठिन परिस्थिति में पुलिस टीम ने साहस, टीम भावना और समन्वय के साथ अनेक लोगों का सफल रेस्क्यू किया। इस कार्य के लिए विभिन्न सामाजिक एवं शासकीय संस्थाओं द्वारा सम्मानित किया गया। इसी दौरान तत्कालीन मुख्यमंत्री श्री बी.सी. खण्डूरी द्वारा उन्हें “बेस्ट पुलिस ऑफिसर ऑफ यात्रा काल-2010” सम्मान से भी अलंकृत किया गया।

इसके पश्चात जनपद हरिद्वार में महत्वपूर्ण चौकियों एवं थानों के प्रभारी के रूप में सेवाएं दीं। वर्ष 2013-14 में लक्सर क्षेत्र में हुई एक संवेदनशील घटना के दौरान संयम एवं पेशेवर पुलिसिंग का परिचय देते हुए बिना बल प्रयोग के आरोपी को सुरक्षित गिरफ्तार किया गया तथा पीड़ित परिवार को सुरक्षा प्रदान की गई।

चमोली में सेवा यात्रा का अंतिम पड़ाव

वर्ष 2022 में पुनः पर्वतीय जनपद चमोली में स्थानांतरण के बाद उन्होंने श्री बदरीनाथ धाम कोतवाली में वरिष्ठ उपनिरीक्षक, थराली में थानाध्यक्ष तथा निरीक्षक पद पर पदोन्नति के बाद प्रभारी निरीक्षक थराली, कर्णप्रयाग और ज्योतिर्मठ के रूप में अपनी सेवाएं दीं।

उन्होंने कहा कि उनकी पुलिस सेवा यात्रा का प्रारंभ माँ गंगोत्री की पावन भूमि से हुआ और इसका समापन भगवान बदरीविशाल की भूमि चमोली में हो रहा है। इससे बड़ा सौभाग्य उनके लिए और कुछ नहीं हो सकता।

अपने सेवाकाल में उन्हें चार सेवा पदकों के साथ विभिन्न अवसरों पर अनेक प्रशस्ति-पत्र एवं सम्मान प्राप्त हुए। हालांकि उन्होंने कहा कि उनके लिए सबसे बड़ा सम्मान सदैव जनता का विश्वास, वरिष्ठ अधिकारियों का मार्गदर्शन तथा सहकर्मियों का स्नेह एवं सहयोग रहा है।

उन्होंने कहा कि “वर्दी केवल अधिकार नहीं देती, बल्कि उत्तरदायित्व भी देती है। पद बड़ा नहीं होता, चरित्र बड़ा होता है। भय से नहीं, विश्वास से पुलिस की पहचान बनती है। ईमानदारी की राह कठिन अवश्य होती है, लेकिन अंततः वही सबसे सम्मानित मार्ग है।”

उन्होंने महाभारत के सूत्र “धर्मो रक्षति रक्षितः” का उल्लेख करते हुए कहा कि जो धर्म और कर्तव्य की रक्षा करता है, वही अंततः स्वयं सुरक्षित रहता है।

भावुक होते हुए उन्होंने कहा कि वे आज पुलिस सेवा से सेवानिवृत्त अवश्य हो रहे हैं, लेकिन सेवा की भावना कभी सेवानिवृत्त नहीं होती। अब समाज और राष्ट्र के प्रति अपने दायित्वों का निर्वहन एक नए रूप में करते रहेंगे।

अपने संबोधन के अंत में उन्होंने कहा—

 

“न पद रहेगा, न अधिकार रहेगा,

बस कर्म का अमिट संस्कार रहेगा।

वर्दी उतर जाएगी एक दिन तन से,

लेकिन उत्तराखण्ड पुलिस मेरे हृदय में जीवन भर रहेगी।

जब-जब गंगोत्री की धारा बहेगी,

जब-जब केदार की घंटियाँ बजेंगी,

जब-जब चारों धामों के कपाट खुलेंगे,

मुझे अपनी यह गौरवमयी सेवा-यात्रा अवश्य स्मरण आएगी।”

 

हेड कांस्टेबल मोहन सिंह रावत को भी दी गई भावभीनी विदाई

इसी अवसर पर हेड कांस्टेबल मोहन सिंह रावत को भी अधिवर्षता आयु पूर्ण करने पर पुलिस विभाग द्वारा भावभीनी विदाई दी गई।

श्री मोहन सिंह रावत दिनांक 21 अप्रैल 2002 को कांस्टेबल पद पर पुलिस विभाग में भर्ती हुए तथा दिनांक 30 दिसम्बर 2022 को हेड कांस्टेबल पद पर पदोन्नत हुए। अपने सेवाकाल के दौरान उन्होंने जनपद रुद्रप्रयाग एवं चमोली में पुलिस बल के साथ विभिन्न दायित्वों का निर्वहन किया। इसके अतिरिक्त उन्होंने भारतीय सेना में भी अपनी सेवाएं प्रदान कीं।

लगभग 24 वर्ष 05 माह 09 दिन के सेवाकाल को पूर्ण करने के उपरांत दिनांक 30 सितम्बर 2026 को वे अधिवर्षता आयु पूर्ण कर सेवानिवृत्त हुए। इस अवसर पर पुलिस अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने उनके सेवाकाल की सराहना करते हुए उनके स्वस्थ, सुखमय एवं उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

पुलिस विभाग द्वारा उनके दीर्घ सेवाकाल, कर्तव्यनिष्ठा एवं विभाग के प्रति समर्पण के लिए आभार व्यक्त करते हुए उन्हें सेवानिवृत्त जीवन की शुभकामनाएं दी गईं।

सेवा समाप्त नहीं, एक नए अध्याय की शुरुआत

इस अवसर पर उपस्थित पुलिस अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने दोनों सेवानिवृत्त पुलिसकर्मियों के दीर्घ सेवाकाल, कर्तव्यनिष्ठा एवं विभाग के प्रति समर्पण की सराहना करते हुए उनके स्वस्थ, सुखमय एवं उज्ज्वल भविष्य की कामना की तथा भावभीनी विदाई दी।

चमोली पुलिस परिवार निरीक्षक देवेन्द्र सिंह रावत एवं हेड कांस्टेबल मोहन सिंह रावत के दीर्घ सेवाकाल, कर्तव्यनिष्ठा और विभाग के प्रति समर्पण के लिए उनका आभार व्यक्त करता है तथा उनके सुखद, स्वस्थ एवं सम्मानपूर्ण सेवानिवृत्त जीवन की मंगलकामना करता है।

इस अवसर पर पूर्व विधायक केदारनाथ श्री मनोज रावत, पुलिस उपाधीक्षक कर्णप्रयाग त्रिवेन्द्र सिंह राणा, पुलिस उपाधीक्षक चमोली मदन सिंह बिष्ट सहित निरीक्षक देवेन्द्र रावत के गृह क्षेत्र से आए विभिन्न जनप्रतिनिधि, परिजन एवं पुलिस अधिकारी/कर्मचारी मौजूद रहे।

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