गौचर (चमोली)। सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज गौचर, चमोली में शुक्रवार को ‘नमामि भारतम्’ अभियान के अंतर्गत वंदे मातरम् के 150 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में सामूहिक गायन कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस अवसर पर विद्या भारती से संबद्ध विद्यालयों में निर्धारित समय पर एक साथ, एक स्वर में संपूर्ण वंदे मातरम् का सामूहिक गायन किया गया।

भारत की सांस्कृतिक परंपरा में मातृभूमि को भारत माता के स्वरूप में पूजनीय माना गया है। ‘वंदे मातरम्’ में इसी मातृभूमि के प्रति श्रद्धा, सम्मान और समर्पण की भावना अभिव्यक्त होती है। प्रसिद्ध साहित्यकार बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने ‘वंदे मातरम्’ की रचना की, जिसे उनके प्रसिद्ध उपन्यास आनंदमठ में स्थान मिला। स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान यह गीत राष्ट्रीय चेतना और देशभक्ति की भावना जगाने वाला प्रेरणास्रोत बना।

कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि वंदे मातरम् केवल एक गीत नहीं, बल्कि राष्ट्रप्रेम, राष्ट्रीय चेतना, त्याग और मातृभूमि के प्रति समर्पण की भावना का प्रतीक है। इसके 150 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर देशभर में एक समय, एक स्वर में संपूर्ण वंदे मातरम् का गायन होना प्रत्येक भारतीय के लिए गौरव का विषय है।

विद्यालय के प्रधानाचार्य श्री मदन सिंह चौधरी जी ने समस्त नगरवासियों एवं छात्र-छात्राओं से राष्ट्रप्रेम की प्रेरणा देने वाले संपूर्ण वंदे मातरम् के सामूहिक गायन में सहभागी बनने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन विद्यार्थियों और समाज में राष्ट्र के प्रति सम्मान, समर्पण एवं एकता की भावना को मजबूत करते हैं तथा हमारी गौरवशाली सांस्कृतिक विरासत से नई पीढ़ी को जोड़ने का कार्य करते हैं।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि श्री जगमोहन सिंह गोसाई जी ने वंदे मातरम् के महत्व पर प्रकाश डालते हुए सभी से इसके सामूहिक गायन में सहभागी बनने का आह्वान किया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता श्री सुरेंद्र सिंह कनवासी जी ने की। इस अवसर पर लोक जन कल्याण समिति के अध्यक्ष श्री सुनील पंवार जी, विद्यालय प्रबंध समिति के उपाध्यक्ष श्री भगवती प्रसाद खंडूड़ी जी सहित विद्यालय के आचार्य-आचार्या, छात्र-छात्राएं एवं अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

सामूहिक रूप से संपूर्ण वंदे मातरम् के गायन से विद्यालय परिसर राष्ट्रभक्ति, राष्ट्रीय एकता और देशप्रेम की भावना से ओत-प्रोत हो उठा।

‘नमामि भारतम्’ के अंतर्गत वंदे मातरम् का सामूहिक गायन

 

गौचर (चमोली)। सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज गौचर, चमोली में शुक्रवार को ‘नमामि भारतम्’ अभियान के अंतर्गत वंदे मातरम् के 150 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में सामूहिक गायन कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस अवसर पर विद्या भारती से संबद्ध विद्यालयों में निर्धारित समय पर एक साथ, एक स्वर में संपूर्ण वंदे मातरम् का सामूहिक गायन किया गया।

भारत की सांस्कृतिक परंपरा में मातृभूमि को भारत माता के स्वरूप में पूजनीय माना गया है। ‘वंदे मातरम्’ में इसी मातृभूमि के प्रति श्रद्धा, सम्मान और समर्पण की भावना अभिव्यक्त होती है। प्रसिद्ध साहित्यकार बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने ‘वंदे मातरम्’ की रचना की, जिसे उनके प्रसिद्ध उपन्यास आनंदमठ में स्थान मिला। स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान यह गीत राष्ट्रीय चेतना और देशभक्ति की भावना जगाने वाला प्रेरणास्रोत बना।

कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि वंदे मातरम् केवल एक गीत नहीं, बल्कि राष्ट्रप्रेम, राष्ट्रीय चेतना, त्याग और मातृभूमि के प्रति समर्पण की भावना का प्रतीक है। इसके 150 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर देशभर में एक समय, एक स्वर में संपूर्ण वंदे मातरम् का गायन होना प्रत्येक भारतीय के लिए गौरव का विषय है।

विद्यालय के प्रधानाचार्य श्री मदन सिंह चौधरी जी ने समस्त नगरवासियों एवं छात्र-छात्राओं से राष्ट्रप्रेम की प्रेरणा देने वाले संपूर्ण वंदे मातरम् के सामूहिक गायन में सहभागी बनने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन विद्यार्थियों और समाज में राष्ट्र के प्रति सम्मान, समर्पण एवं एकता की भावना को मजबूत करते हैं तथा हमारी गौरवशाली सांस्कृतिक विरासत से नई पीढ़ी को जोड़ने का कार्य करते हैं।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि श्री जगमोहन सिंह गोसाई जी ने वंदे मातरम् के महत्व पर प्रकाश डालते हुए सभी से इसके सामूहिक गायन में सहभागी बनने का आह्वान किया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता श्री सुरेंद्र सिंह कनवासी जी ने की। इस अवसर पर लोक जन कल्याण समिति के अध्यक्ष श्री सुनील पंवार जी, विद्यालय प्रबंध समिति के उपाध्यक्ष श्री भगवती प्रसाद खंडूड़ी जी सहित विद्यालय के आचार्य-आचार्या, छात्र-छात्राएं एवं अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

सामूहिक रूप से संपूर्ण वंदे मातरम् के गायन से विद्यालय परिसर राष्ट्रभक्ति, राष्ट्रीय एकता और देशप्रेम की भावना से ओत-प्रोत हो उठा।

गौचर (चमोली)। सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज गौचर, चमोली में शुक्रवार को ‘नमामि भारतम्’ अभियान के अंतर्गत वंदे मातरम् के 150 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में सामूहिक गायन कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस अवसर पर विद्या भारती से संबद्ध विद्यालयों में निर्धारित समय पर एक साथ, एक स्वर में संपूर्ण वंदे मातरम् का सामूहिक गायन किया गया।

भारत की सांस्कृतिक परंपरा में मातृभूमि को भारत माता के स्वरूप में पूजनीय माना गया है। ‘वंदे मातरम्’ में इसी मातृभूमि के प्रति श्रद्धा, सम्मान और समर्पण की भावना अभिव्यक्त होती है। प्रसिद्ध साहित्यकार बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने ‘वंदे मातरम्’ की रचना की, जिसे उनके प्रसिद्ध उपन्यास आनंदमठ में स्थान मिला। स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान यह गीत राष्ट्रीय चेतना और देशभक्ति की भावना जगाने वाला प्रेरणास्रोत बना।

कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि वंदे मातरम् केवल एक गीत नहीं, बल्कि राष्ट्रप्रेम, राष्ट्रीय चेतना, त्याग और मातृभूमि के प्रति समर्पण की भावना का प्रतीक है। इसके 150 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर देशभर में एक समय, एक स्वर में संपूर्ण वंदे मातरम् का गायन होना प्रत्येक भारतीय के लिए गौरव का विषय है।

विद्यालय के प्रधानाचार्य श्री मदन सिंह चौधरी जी ने समस्त नगरवासियों एवं छात्र-छात्राओं से राष्ट्रप्रेम की प्रेरणा देने वाले संपूर्ण वंदे मातरम् के सामूहिक गायन में सहभागी बनने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन विद्यार्थियों और समाज में राष्ट्र के प्रति सम्मान, समर्पण एवं एकता की भावना को मजबूत करते हैं तथा हमारी गौरवशाली सांस्कृतिक विरासत से नई पीढ़ी को जोड़ने का कार्य करते हैं।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि श्री जगमोहन सिंह गोसाई जी ने वंदे मातरम् के महत्व पर प्रकाश डालते हुए सभी से इसके सामूहिक गायन में सहभागी बनने का आह्वान किया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता श्री सुरेंद्र सिंह कनवासी जी ने की। इस अवसर पर लोक जन कल्याण समिति के अध्यक्ष श्री सुनील पंवार जी, विद्यालय प्रबंध समिति के उपाध्यक्ष श्री भगवती प्रसाद खंडूड़ी जी सहित विद्यालय के आचार्य-आचार्या, छात्र-छात्राएं एवं अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

सामूहिक रूप से संपूर्ण वंदे मातरम् के गायन से विद्यालय परिसर राष्ट्रभक्ति, राष्ट्रीय एकता और देशप्रेम की भावना से ओत-प्रोत हो उठा।

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