“16 नवम्बर रात्रि 9:37 बजे” पर शीतकाल लिए बंद होंगे विश्व विख्यात श्री बदरीनाथ धाम जी के कपाट।।
अभी अभी विजयदशमी के पावन पर्व पर विधिवत विधि विधान के साथ श्री बदरीनाथ धाम जी के कपाट बंद होने की तिथि को घोषित किया गया….
श्रीधाम के कपाट बंद होने से पहले होने वाली पंच दिवसीय पूजाओं और देवडोलियों के प्रस्थान का कार्यक्रम भी हुआ निर्धारित।।
पंचदेव पूजाओं का विशेष महत्व है श्री बदरीनाथ धाम में, पंच पूजाओं के शुरू होते ही धाम में देवताओं का आगमन हो जाता है और शीतकाल के छः महीने तक भगवान बदरीविशाल जी की पूजा का अधिकार देवताओं को मिल जाता है, जबकि बाकी छः महीने मनुष्य पूजा करते हैं।

पंचदेव पूजाओं की तिथियां
•प्रथम पूजा ( 12 नवंबर): भगवान गणेश की भोग पूजा साथ संध्या में कपाट बंद किए जाते हैं।
•द्वितीय (13 नवंबर): आदि केदारेश्वर मंदिर व शंकराचार्य मंदिर के कपाट बंद किए जाते हैं
•तृतीय दिवस (14 नवंबर): खडग-पुस्तक पूजन और वेद ऋचाओं का वाचन बंद किया जाता है।
•चतुर्थ दिवस (15 नवंबर): मां लक्ष्मी जी का आह्वान किया जायेगा कि आप आइये और कपाट बंद होने से पूर्व भगवान के साथ विराजिए।

•पंचम दिवस (16 नवंबर): रात 9:37 बजे पर मंत्रोचार, विधि विधान के साथ भगवान बदरी विशाल के कपाट शीतकाल देवपूजा के लिए बंद किए जाएंगे।।
™उत्तराखण्ड देव दर्शन

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