देहरादून/उत्तराखंड। प्रदेशभर में कार्यरत BRP-CRP (ब्लॉक रिसोर्स पर्सन/क्लस्टर रिसोर्स पर्सन) ने एक बार फिर वेतन भुगतान में हो रही अनियमितता और देरी को लेकर अपनी नाराजगी जताई है। BRP-CRP प्रतिनिधियों ने विधायक भोपाल राम टम्टा को ज्ञापन सौंपकर अपनी समस्याओं से अवगत कराया और सरकार से उनके वेतन का भुगतान सीधे समग्र शिक्षा के माध्यम से किए जाने की मांग की।

कर्मियों का कहना है कि उन्हें कई बार दो-दो और तीन-तीन माह तक वेतन का इंतजार करना पड़ता है। वर्तमान में भी कई BRP-CRP को 66 दिनों से वेतन नहीं मिला है, जबकि इस दौरान उन्हें लगातार विद्यालयों का भ्रमण, निरीक्षण, शैक्षणिक सहयोग और विभागीय कार्यों के लिए अपने खर्च पर स्कूल से स्कूल जाना पड़ रहा है।

₹40 हजार निर्धारित वेतन, भुगतान में भारी अंतर का आरोप

BRP-CRP कर्मियों ने बताया कि उनका वेतन ₹40,000 निर्धारित बताया जाता है, लेकिन वास्तविक भुगतान में भारी अंतर देखने को मिल रहा है। उनके अनुसार कभी ₹22,000 तो कभी ₹27,000 तक की राशि खाते में आने की बात सामने आती है। कर्मियों का सवाल है कि शेष राशि किस मद में काटी जा रही है और उसका स्पष्ट विवरण क्यों नहीं दिया जा रहा है।

कर्मियों ने यह भी आरोप लगाया कि वेतन स्लिप मांगने पर कई बार स्पष्ट विवरण के बजाय ब्लैंक स्लिप उपलब्ध कराई जाती है। उनका कहना है कि यदि ₹40,000 का वेतन निर्धारित है तो कटौती और भुगतान का पूरा ब्यौरा पारदर्शी तरीके से उपलब्ध कराया जाना चाहिए।

“यह मामला हमारा नहीं, कंपनी से बात करो”—कर्मियों का आरोप

BRP-CRP का कहना है कि वेतन संबंधी समस्या को लेकर विभागीय स्तर पर अवगत कराने के बावजूद उन्हें कथित तौर पर यह कहकर टाल दिया जाता है कि “यह मामला हमारा नहीं है, आप अपनी कंपनी से बात करें।” इससे कर्मियों में असमंजस और निराशा बढ़ रही है।

कर्मियों का कहना है कि वे धरातल पर विद्यालयों में लगातार जिम्मेदारियां निभा रहे हैं, लेकिन वेतन भुगतान को लेकर उनकी समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो पा रहा है। “जब 65 दिनों तक वेतन नहीं मिलेगा तो परिवार का खर्च, भोजन, आवागमन और अन्य जरूरी जरूरतें कैसे पूरी होंगी?” यह सवाल BRP-CRP ने सरकार के सामने रखा है।

समग्र शिक्षा से सीधे वेतन जारी करने की मांग

BRP-CRP ने सरकार से मांग की है कि उनका वेतन सीधे समग्र शिक्षा के तहत जारी किया जाए, जिससे भुगतान व्यवस्था में पारदर्शिता आए और बार-बार होने वाली देरी एवं कटौती की समस्या समाप्त हो सके।

कर्मियों का कहना है कि यदि सरकार की ओर से सीधे वेतन भुगतान की व्यवस्था होती है तो वेतन की राशि, कटौती और भुगतान की स्थिति स्पष्ट रहेगी तथा किसी निजी कंपनी या अन्य माध्यम पर निर्भरता कम होगी।

मानसिक उत्पीड़न का आरोप, आंदोलन की चेतावनी

BRP-CRP प्रतिनिधियों ने कहा कि लगातार वेतन में देरी, भुगतान में अंतर और स्पष्ट जानकारी नहीं मिलने से कर्मचारी मानसिक एवं आर्थिक दबाव में हैं। उनका दावा है कि इस स्थिति के चलते कुछ BRP-CRP त्यागपत्र भी दे चुके हैं, जबकि कुछ अन्य कर्मचारी भी नौकरी छोड़ने को मजबूर होने की स्थिति में हैं।

BRP-CRP का स्पष्ट कहना है कि यदि उन्हें पूरा निर्धारित ₹40,000 वेतन नहीं मिलता और वेतन भुगतान विभाग/समग्र शिक्षा के माध्यम से पारदर्शी तरीके से सुनिश्चित नहीं किया जाता है, तो समस्या का समाधान नहीं होने पर सम्पूर्ण प्रदेश में आंदोलन शुरू करने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।

कर्मियों ने सरकार और जनप्रतिनिधियों से मांग की है कि लंबित 65 दिनों के वेतन का तत्काल भुगतान, वेतन में होने वाली कटौती का स्पष्ट विवरण तथा भविष्य में समय पर पूर्ण वेतन भुगतान की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।

BRP-CRP का कहना है—“हम विद्यालयों में पूरी जिम्मेदारी से काम कर रहे हैं, सरकार हमारी मेहनत और हमारी परेशानी को भी समझे।”

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