चमोली ।नौ वर्षों के लंबे अंतराल तक अपनों से बिछड़कर दर-दर भटकते रहे रफीक की जिंदगी में चमोली पुलिस उम्मीद की रोशनी बनकर सामने आई। पुलिस की संवेदनशील पहल और निरंतर प्रयासों के परिणामस्वरूप रफीक सकुशल अपने घर लौट सका। जिस बेटे की राह देखते-देखते परिवार की आँखें पथरा गई थीं, जब वही बेटा बरसों बाद उनके सामने खड़ा हुआ और उन्होंने उसे गले लगाया तो परिजनों की आँखें खुशी से नम हो उठीं और नौ वर्षों का दर्द आँसुओं में बह निकला।
दिनांक 08 फरवरी 2026 की रात्रि को चमोली बाजार में गश्त कर रहे पुलिसकर्मियों की नजर एक शख्स पर पड़ी। पूछताछ में वह मानसिक रूप से अस्वस्थ प्रतीत हुआ और अपने बारे में स्पष्ट जानकारी नहीं दें पाया। पुलिसकर्मी सुरक्षा एवं मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए उसे कोतवाली चमोली ले आए।
जहाँ प्रभारी निरीक्षक अनुरोध व्यास द्वारा धैर्यपूर्वक एवं संवेदनशीलता के साथ जब उससे बातचीत शुरू की तो काफी प्रयासों के बाद उसने अपना नाम रफीक पुत्र कमीर निवासी ग्राम सतवा, थाना अवधपुर, जिला कठिहार बिहार बताया। तत्पश्चात प्रभारी निरीक्षक द्वारा बिहार में संबंधित थाने से संपर्क किया गया और परिजनों तक सूचना पहुंँचाई। रफीक का फोटो परिजनों को भेजकर उसकी पहचान करायी गई, जिसके बाद परिजनों को कोतवाली चमोली बुलाया गया। इस दौरान कोतवाली चमोली मे नियुक्त पुलिस कर्मियों ने रफीक की देखभाल, रहने व खाने की समुचित व्यवस्था की ताकि वह सुरक्षित और स्वस्थ रह सके।
आज परिजनों के कोतवाली चमोली पहुँचने पर रफीक को सकुशल उनके सुपुर्द कर दिया गया। परिजनों ने बताया कि रफीक मानसिक रूप से अस्वस्थ है और वर्ष 2017 में बिना बताए घर से चला गया था। इतने सालों में खोजबीन के बावजूद उसका कोई सुराग नहीं मिला, जिससे परिवार काफी निराश था।
वर्षों बाद रफीक को सुरक्षित पाकर परिजन भावुक हो गए उन्होंने कहा कि पुलिस ने केवल एक खोए हुए व्यक्ति को उसके घर तक नहीं पहुँचाया, बल्कि एक बिछड़े परिवार को फिर से जोड़ने का कार्य किया है। इन दिनों में पुलिस जवानों ने रफीक की जो देखभाल की है, वह सच्चे अर्थों में चमोली पुलिस कि मानवता, संवेदनशीलता और कर्तव्य के प्रति उनके समर्पण को दोहराता है।
