दो माह से नहीं दी गई मजदूरी कंपनी की तानाशाही 

देहरादून। समग्र शिक्षा अभियान के अंतर्गत कार्यरत BRP एवं CRP कर्मियों में लगातार बढ़ते आर्थिक शोषण और वेतन विसंगतियों को लेकर भारी नाराजगी देखने को मिल रही है। कर्मियों का आरोप है कि आउटसोर्स कंपनी के माध्यम से कार्य कराने की व्यवस्था उनके लिए परेशानी और शोषण का कारण बन चुकी है।

कर्मियों का कहना है कि विभागीय स्तर पर उनके कार्य का मानदेय लगभग ₹40,000 निर्धारित बताया जाता है, लेकिन वास्तविकता में उन्हें मात्र ₹28,800 की सैलरी स्लिप दी जा रही है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि शेष लगभग ₹11,200 की राशि आखिर कहां जा रही है और किस मद में काटी जा रही है, इसकी कोई स्पष्ट जानकारी कर्मचारियों को नहीं दी जा रही।

BRP-CRP कर्मियों ने आरोप लगाया कि पढ़े-लिखे और जिम्मेदार पदों पर कार्य करने के बावजूद उन्हें पारदर्शिता से वंचित रखा जा रहा है। कर्मचारियों का कहना है कि न तो वेतन कटौती का स्पष्ट विवरण दिया जाता है और न ही किसी प्रकार की संतोषजनक जानकारी उपलब्ध कराई जाती है। इससे कर्मचारियों में भारी असंतोष व्याप्त है।

कर्मियों के अनुसार वे विद्यालयों की शैक्षिक गुणवत्ता सुधार, मॉनिटरिंग, प्रशिक्षण, सर्वेक्षण और विभागीय योजनाओं को धरातल पर लागू करने जैसे महत्वपूर्ण कार्य लगातार कर रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद उन्हें समय पर उचित वेतन और सम्मान नहीं मिल पा रहा।

कर्मचारियों ने मांग उठाई है कि आउटसोर्स कंपनी की व्यवस्था समाप्त कर उनका वेतन सीधे समग्र शिक्षा विभाग के माध्यम से जारी किया जाए, ताकि पारदर्शिता बनी रहे और कर्मचारियों का आर्थिक शोषण बंद हो सके।

कर्मियों ने कहा कि यदि जल्द इस मामले की उच्चस्तरीय जांच नहीं हुई और वेतन संबंधी पारदर्शिता सुनिश्चित नहीं की गई, तो प्रदेशभर के BRP-CRP कर्मचारी आंदोलन का रास्ता अपनाने को मजबूर होंगे।

उन्होंने सरकार और शिक्षा विभाग से मांग की है कि कर्मचारियों की मेहनत और अधिकारों का सम्मान करते हुए वेतन भुगतान व्यवस्था में सुधार किया जाए तथा कटौती की पूरी जानकारी सार्वजनिक की जाए।

error: Content is protected !!